Home PERSONS Celebrities Tokyo Paralympics 2021: टोक्यो पैराओलंपिक के 10 भारतीय मेडलिस्ट खिलाड़ी

Tokyo Paralympics 2021: टोक्यो पैराओलंपिक के 10 भारतीय मेडलिस्ट खिलाड़ी

टोक्यो पैरालंपिक 2020 (Tokyo Paralympics 2020) अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचता जा रहा है। 5 सितंबर 2021 को इसका आखरी दिन है। भारत के लिए टोक्यो ओलंपिक और टोक्यो पैरालंपिक दोनों ही शानदार रहा। एक तरफ जहां ओलंपिक में भारत ने 7 मेडल अपने नाम किए, तो पैरालंपिक में अब तक भारत 10 मेडल अपने नाम कर चुका है। जिसमें 2 गोल्ड, 5 सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल है। यह भारत का पैरालंपिक में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। इससे पहले रियो में भारत ने 8 मेडल जीते थे। हालांकि अभी और मैच होना बाकी है और भारत को और पदकों की उम्मीद है। लेकिन आज हम आपको बताते हैं भारत का अब तक का टोक्यो पैरालंपिक का सफर और उन 10 खिलाड़ियों के नाम जिन्होंने इस खेल आयोजन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर मेडल अपने नाम किया है…

Bhavinaben Patel (Table Tennis) – Silver

Tokyo Paralympics: India's Bhavinaben Patel wins historic silver in table  tennis

Tokyo Paralympic 2021 मैं पेडलर भाविनाबेन पटेल ने किया देश का नाम रोशन भाविना ने विमेंस इंडिविजुअल प्लान फॉर टेबल टेनिस में जीता दोस्तों इनका रियल नेम भाविना हसमुख भाई पटेल है और निक नेम भाविना है और दोस्तों यह प्रोफेशन से एक टेबल टेनिस प्लेयर है वही बात करते हैं इनकी जन्म की तो इनका जन्म 6 नवंबर 1986 मैं मेहसाना गुजरात में हुआ और उनका होमटाउन भी मेहसाना गुजरात में है

वही बात करते हैं इनकी उम्र की इनकी उम्र 2020 के हिसाब से 34 साल हो चुकी है और दोस्तों इन्होंने अपने कॉलेज की पढ़ाई blind people Association Ahmedabad से की और दोस्त एजुकेशन क्वालीफिकेशन iIT course from Bpa से किया है दोस्तों आपको मैं रहते हैं उनकी फैमिली से तो दोस्तों इनके जब पिता का नाम है वह है हसमुख भाई पटेल और उनके हस्बैंड का नाम है निकुल पटेल

चलिए दोस्तों आप बात कर लेते हैं इनके फिजिकल स्टेटस के बारे में दोस्तों इस की हाइट 5 फुट 3 इंच है और इनका वजन लगभग 60 किलोग्राम है और दोस्तों नेशनलिटी से इंडियन है और रिलीजन से हिंदू है दोस्तों मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं इन्होंने 5 गोल्ड मेडल जीता है और 13 सिल्वर मेडल जीता है और इसके अलावा उन्होंने कई ट्रॉफी भी जीती है पर हाल ही में इन्होंने पैरा ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता है.

Nishad Kumar (High Jump) – Silver

Nishad Kumar Wins Silver For India In High Jump At Tokyo Paralympics 2020

8 वर्ष की उम्र में उन्होंने गवा दिया अपना एक हाथ, तोक्यो पैरालिंपिक से ठीक पहले वह करोना महामारी के शिकार हुए थे, लेकिन निषाद कुमार हौसला कभी नहीं हारे उन्होंने रविवार को तोक्यो पैरालिंपिक की पुरुषों की ऊंची कूद T47 स्पर्धा में एशियाई रेकॉर्ड के साथ सिल्वर पदक जीता 21 साल के निषाद कुमार ने 2.06 मीटर की कूद लगाकर एशियाई रेकॉर्ड बनाया और दूसरे स्थान पर रहे

टोक्यो में भारत को सिल्वर मेडल दिलाने वाले निषाद कुमार हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के मंडला ंप के छोटे से गांव बदायूं के रहने वाले हैं निशांत ने जैसे ही मेडल जीता वैसे ही परिजनों मैं खुशी छा गई इस अवसर पर परिजनों ने और गांव वासियों ने लड्डू बांटकर खुशियां मनाई है मैं जब मैं

Avani Lekhara (Shooting) – Gold

Anand Mahindra dedicates first customised 'special' SUV to Avani Lekhara

अवनी लखेरा जो पैरा ओलंपिक खेल में भारत के लिए गोल्ड मेडल आने वाली पहली महिला बन गई है बात करें अवनी की प्रारंभिक जीवन की तो हम आपको बता दें इनका जन्म आज से करीब 20 साल पूर्व हुआ था यानी कि 8 नवंबर सन 2001 को अवनी राजस्थान की रहने वाली है और राजस्थान के जयपुर में ही इनका जन्म हुआ था

दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दे अवनी बचपन से ही एक ब्रिलियंट स्टूडेंट रही है चाहे वह स्टडीज की बात हो चाहे वह अन्य एक्टिविटी की बात हो वह सब में अव्वल रहती थी अवनी के 7 11 वर्ष तक तो सब कुछ ठीक चल रहा था वह कहते हैं ना कि आप को जितना महान भरना है उतनी ही बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा

ऐसे ही एक विषम परिस्थिति का सामना अवनी को भी तब करना पड़ा जब वह 12 वर्ष के पड़ाव में थी अपने जीवन के जब अवनी अपने पिता के साथ कहीं बाहर जा रही थी तब उनका रोड एक्सीडेंट हो गया जो कि काफी भीषण हादसा था लेकिन कहते हैं ना जाको राखे साइयां मार सके ना कोई हालांकि इस हादसे में अवनी और उसके पिता के जान तो बच गई लेकिन हादसा इतना भीषण था की अवनी को इसकी वजह से पैरालिसिस हो गया उस समय अवनी के शरीर के अधिकतम कर पैरालाइज हो चुके थे

दोस्तों अवनी के माता-पिता बताते हैं कि जब अवनी का एक्सीडेंट हुआ और उनका अधिकतम शरीर भाग पैरालाइसिस हो गया तब वह अंदर से बहुत ही ज्यादा टूट चुकी थी एक्सीडेंट के तीन साल बाद ही अवनी ने अपने शूटिंग को अपनी जिंदगी बना ली और महज 5 साल के अंतराल अवनी ने गोल्डन मेडल का तमगा हासिल कर लिया इसके बाद से ही दोस्तों शूटिंग प्रतियोगिता में मानो गोल्ड पर निशाना साधना उनकी आदत सी बन गई

6 साल के अपने करियर में अवनी ने कितने गोल्ड पर निशाना साधा यह अवनी तब को पता नहीं लेकिन दोस्तों अवनी के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य अभी बाकी था जो कि था पैरा ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाना लव दान की वजह से जब पूरे विश्व में ताला लगा हुआ था

टोक्यो पैरालंपिक को पोस्टपोनड कर दिया गया तब भी अवनी ने अपनी विल पावर कमजोर नहीं होने दी और अपनी प्रैक्टिस जारी रखी घर पर ही और आज उसका नतीजा हम सब को देखने को मिल रहा है क्योंकि अवनी लखेरा ने इतिहास रच दिया है और भारत की ओर से पैरालंपिक पहली महिला गोल्ड मेडलिस्ट बन गई है

Yogesh Kathuniya (Discus Throw) – Silver

Have been training without a coach: discus throw silver-winner Kathuniya -  Hindustan Times

Yogesh Kathuniya ने पुरुषों की चक्का फेंक स्पर्धा के F56 वर्ग में शानदार खेल दिखाते हुए रजत पदक हासिल किया। उन्होंने अपने छठे और अंतिम प्रयास में 44.38 मीटर चक्का फेंककर दूसरे स्थान पर कब्जा जमाया 3 मार्च 1997 को हरियाणा में जन्में

Yogesh Kathuniya का बचपन आसान नहीं था आठ साल की उम्र में ही वो लकवे का शिकार हो गए थे लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपने का पीछा किया। बड़े-बड़े सपने देखने वाले Yogesh Kathuniya के पास कोचिंग की सुविधाएं नहीं थीं जिसकी वजह से उन्हें अपने कौशल और प्रदर्शन में सुधार करने में परेशानी हुई।

दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उन्होंने पाने कौशल पर ध्यान दिया। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कोच सत्यपाल सिंह से ट्रेनिंग ली। इसके बाद उन्होंने अपने छठे प्रयास में साल 2019 में दुबई विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की डिस्कस थ्रो एफ56 स्पर्धा के फाइनल में कांस्य पदक जीतकर टोक्यो पैरालंपिक में अपनी जगह बना ली। उसमें उन्होंने 42.51 मीटर का थ्रो फेंका था।

Yogesh Kathuniya द्वारा हासिल की गईं उपलब्धियां

साल 2018 में Yogesh Kathuniya ने बर्लिन में आयोजित पैरा-एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक हासिल करते हुए पुरुषों के डिस्कस एफ36 वर्ग स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड को तोड़कर अपने नाम कर लिया। उन्होंने उसमें 45.18 मीटर का थ्रो फेंका था और चीन के कुइकिंग के 42.96 मीटर के विश्व रिकॉर्ड को अपने नाम किया था।

इसके साथ ही Yogesh Kathuniya ने विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की डिस्कस थ्रो एफ56 श्रेणी स्पर्धा में 42.05 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक भी हासिल किया था।

Devendra Jhajharia (Javelin Throw) – Silver

Tokyo Paralympics: Devendra Jhajharia dedicates silver medal to late father  | Tokyo Paralympics News - Times of India

यह भारत के ऐसे खिलाड़ी है जो पैरा ओलंपिक में विश्व रिकॉर्ड के साथ दो बार स्वर्ण पदक ला चुके हैं लेकिन इस सब के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा झांझरिया का जन्म राजस्थान के चूरु जिले में किसान परिवार में हुआ था लेकिन 8 साल की उम्र में उनका जीवन एक बड़ा मोड़ ले लेता है

जब पड़ोसियों के साथ लुका छुपी खेल रहे थे तो सपने के चक्कर में एक पेड़ पर चढ़ गए जहां पर उन्होंने गलती से 11000 बोर्ड वाले तार को गलती से छू लिया जिसके बाद वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े डॉक्टर ने उनकी जान तो बचा ली लेकिन उनका बाया हाथ तुरंत काटना पड़ा

1997 में देवेंद्र के स्कूल में स्पोर्ट्स डे के दौरान द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित कोच आरडी सिंह को बुलाया गया यहां आरडी सिंह ने देवेंद्र को खेलते हुए देखा और वह उसकी क्षमता को जान गए और उसे अपना शिष्य बना लिया है उनके नाम 62.15 मीटर भाला फेंक का रिकॉर्ड है और यह पहले पद्मश्री भूषण से नवाजा गया है

इससे पहले उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार 2017 में और 2005 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है 40 साल के देवेंद्र झाझरिया का यह आखिरी ओलंपिक माना जा रहा है

Sundar Singh Gurjar (Javelin Throw)

Tokyo Paralympics: Sundar Singh Gurjar buries ghost of Rio | Tokyo  Paralympics News - Times of India

टोक्यो पैरालिंपिक्स (Tokyo Paralympics) के जैवलिन थ्रो (Javelin Throw) इवेंट में भारत रियो वाली कामयाबी तो नहीं दोहरा सका, पर मेडल जीतने में कामयाब जरूर रहा. जैवलिन थ्रो में भारत के तीन एथलीट ने शिरकत किया था, जिनमें रियो के गोल्ड मेडलिस्ट देवेंद्र झाझड़िया (Devendra Jhajharia) के अलावा अजीत सिंह और सुंदर सिंह गुर्जर (Sundar Singh Gurjar) शामिल थे.

इनमें दो जैवलिन थ्रोअर भारत के लिए मेडल जीतने में कामयाब रहे. देवेंद्र झाझड़िया ने 64.35 मीटर की दूरी तक भाला फेंकते हुए देश के लिए सिल्वर मेडल जीता तो सुंदर सिंह गुर्जर ने 64.01 मीटर तक भाला फेंककर कांसा जीता. मतलब रियो की तरह गोल्ड तो जैवलिन में भारत की झोली में टोक्यो में नहीं गिर सका. पर डबल धमाल जरूर देखने को मिला.

पुरुषों के जैवलिन थ्रो इवेंट का गोल्ड मेडल श्रीलंका के हेराथ के नाम रहा, जिन्होंने 67.79 मीटर की दूरी नापते हुए नया वर्ल्ड रिकॉर्ड और पैरालिंपिक्स रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने इस मामले में भारत के देवेंद्र झाझड़िया का रियो पैरालिंपिक्स में कायम किया वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा. हेराथ का जीता गोल्ड टोक्यो पैरालिंपिक्स में श्रीलंका की झोली में गिरा पहला मेडल भी है.

Sumit Antil (Javelin Throw) – Gold

Tokyo Paralympics: Gold Medallist Sumit Antil Says Accident Shattered His  "Dream Of Joining Army" | Olympics News

सुमित के शरीर में कमी जरूर थी लेकिन उसने अपनी मेहनत में कोई कमी नहीं छोड़ी इसी मेहनत के दम पर सुमित ने पैर ना होते हुए भी जैवलिन थ्रो में 68.55 मीटर भाला फेंक कर भारत के झोली में गोल्ड मेडल डाल दिया
सुमित एंटील का जन्म 6 जुलाई 1998 को हरियाणा राज्य के सोनीपत जिले के खेरवा गांव में एक जाट परिवार में हुआ था सुमित बचपन से ही पहलवान बनना चाहते थे और पहलवानी सीखने के लिए सोनीपत के एक अखाड़े में प्रैक्टिस किया करते थे

सुमित भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त को अपनी प्रेरणा मानते हुए कुश्ती के क्षेत्र में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते थे लेकिन साल 2015 में सुमित ने 17 वर्ष की उम्र में एक सड़क दुर्घटना में अपनी बाया पैर खो दिया इस तरफ सुमित का पहलवान बनने का सपना टूट गया

हालांकि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और खेल के क्षेत्र में ही अपना कैरियर बनाने का निर्णय लिया साल 2018 में सुमित की मुलाकात एशियन खेलों के सिल्वर मेडलिस्ट वीरेंद्र धनगर से हुई इसके बाद वीरेंद्र धनगर ने सुमित की मुलाकात जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के AFI एथलेटिक्स जैवलिन कोच नवल सिंह से करवाई और नवल सिंह ने सुमित के बॉडी स्ट्रक्चर को देखते हुए उन्हें जेवलिन थ्रो करने की सलाह दी

इसके बाद सुमित ने कोच नितिन जयसवाल से ट्रेनिंग लेते हुए कई नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और वहां गोल्ड मेडल जीते अब बात करते हैं सुमित के अचीवमेंट के बारे में सुमित ने साल 2019 मैं वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता और इसी के साथ सुमित ने टोक्यो पैरा ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई किया

मार्च 2021 में सुमित ने नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के F44 केटेगरी में 66.90 मीटर भाला फेंक कर नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया 30 अगस्त 2021 को टोक्यो पैरा ओलंपिक में F64 केटेगरी में सुमित ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया सुमित ने फाइनल में 68.55 मीटर भाला फेंक कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और साथ ही साथ भारत की झोली में गोल्ड मेडल भी डाल दिया.

Singhraj Adhana (Shooting) – Bronze

Tokyo Paralympics: How a chance encounter made Singhraj Adhana a shooting  star at 35

टोक्यो पैरा ओलंपिक के शूटिंग स्पर्धा में भारत के सिंहराज ने जीत लिया है ब्रांच मेडल जीत लिया है उन्होंने पुरुषों के 10 मीटर पिस्टल sh1 के फाइनल में तीसरा स्थान हासिल किया है हरियाणा के पैराशूटर ने 216.8 का स्कोर किया और भारत को कांस्य पदक दिलाया

फरीदाबाद में रहने वाले 39 साल के सिंहराज 569 नंबर लाकर छठे स्थान पर है 19 साल के मनीष नरवल क्वालिफिकेशन में 575 अंक में पहले स्थान पर रहे थे लेकिन उन्होंने फाइनल में निराश किया आपको बता दें कि सबसे पहले शूटिंग में सोमवार को जयपुर की अवनी लखेरा ने भारत को गोल्ड मेडल दिलाया था

मौजूदा पैरा ओलंपिक में भारत में अब तक 8 पदक जीत लिया है भारत के खाता में अब तक 2 गोल्ड चार रजत और दो कांस्य पदक आए हैं यह पैरा ओलंपिक के इतिहास में यह भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है रियो पैरालंपिक 2016 में भारत ने 2 स्वर्ण सहित 4 पदक जीते थे

Mariyappan Thangavelu (High Jump) – Silver

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मरियप्पन ने महज 5 साल की उम्र में अपना दाहिना पैर खो दिया था युवा मरियप्पन अपने परिस्थितियों के बावजूद एक अच्छे-अच्छे एथलीट थे उनका जन्म तमिलनाडु के पेरियावदगमपट्टी गांव में एक गरीब परिवार में हुआ था। जब मरियप्पन छोटा था तब उसके पिता ने परिवार छोड़ दिया था।

उनकी मां सरोज ने अकेले ही उनका और उनके तीन भाई-बहनों का पालन-पोषण किया। मरियप्पन के दो छोटे भाई हैं – कुमार और गोपी और एक बड़ी बहन – सुधा। सरोज गुजारा करने के लिए मजदूरी का काम करती थी। उसकी दैनिक मजदूरी लगभग 100 रुपये हुआ करती थी। उम्र के साथ और सभी शारीरिक कामों के कारण, उसने सब्जियां बेचना शुरू कर दिया

Sharad Kumar (High Jump) – Bronze

भारतीय एथलीट शरद कुमार का जन्‍म 1 मार्च 1992 को बिहार राज्‍य के पटना में हुआ था। शरद जब 2 साल के थे तो नकली पोलियो दवा लेने से उनके बाया पैर पैरालाइस हो गया। जिसके कारण वो दिव्‍यांग हो गए। इन्‍होने अपनी स्‍कूली शिक्षा St. Paul’s School Darjeeling से की है। इसी दौरान शरद ने 7 साल की उम्र से हाई जम्‍प प्रेक्टिस करना शुरू किया

शरद कुमार ने 2014 में दक्षिण कोरिया मे सपंन्‍न एशियाई पैरा खेलो में एफ-42 वर्ग में खेलते हुए स्‍वर्ण पदक जीता।
जिसके बाद शरद ने सन् 2017 में लंदन में आयोजित विश्‍व पैरा चैपिंयनशिप में टी-42 कैटेगरी में सिल्‍वर मैडल अपने नाम किया।
सन् 2018 इंडोनेशिया मे आयोजित एशियाई पैरा गेम में इन्‍होने टी-42/63 वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन कर शीर्ष स्‍‍थान हासिल किया व स्‍वर्ण पदक के दावेदार बने।

Anilhttps://anokhefacts.com/
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